Thursday, September 28, 2017

एक रोज....





एक रोज छुपा दूंगा
सारे लफ्ज तुम्हारे
और तुम मेरी खामोशी
पर फिसल जाओगी!!
देखता हूँ कब तलक
छुपी रहोगी मुझसे
एक दिन अपनी ही
नज्म से पिघल जाओगी!!
और कितने चांद
मेरे लिए संभालोगी
मुझे यकीन है कि
तुम रातें बदल डालोगी
मैंने भी रख लिए हैं
कुछ चादं तुम्हारे
मेरे एक ही ख्वाब से
बेशक तुम जल जाओगी!!
अब दोनों होगें ही
तो नज्म नज्म खेलेंगे
वो गोल ना सही
दिल सा भी हो तो ले लेगें
मैने भी भर लिये
कुछ अल्फाज़ तुम्हारे
मेरी खामोशी से
यकीनन तुम बदल जाओगी!!



Wednesday, September 13, 2017

मिर्जा!!


कितना मुश्किल है इश्क़ की कहानी लिखना
जैसे पानी से,पानी पे,पानी लिखना!!
कोई मिर्ज़ा दिल का कोई फलक ढूंढें
और साहिबा उसको चाँद तलक ढूंढें
सुना है बहुत निक्कमी है
कमबख्त मिलती ही नहीं
ऐसी मोहब्बत को कैसे भला,रूहानी लिखना !!
सुना है रोज़ मुकर्रर ,दबे पाँव सी निकलती है
एक नदी कांच की, रात के बंजर में खलती है
चलो लफ़्ज़ों का पैबंद लगा दूं तुम पर
नज़्म की हिचकियों को दिल की मेहरबानी लिखना !!
खेल जाना अगर कोई फिर दिल से खेले
गम कोई गोल सा होकर,चाँद की जगह ले ले
सुबकियां हौले सरक जायें, सिसकियाँ यूँ ही न थक जाये
कतरे कतरे को उस नदी की नादानी लिखना !!
वो नदी साहिबा,सरे आम सी मचलती है
देख मिर्ज़ा तेरे खुलूस में ही पलती है
बड़ा ही शोर करती है जो मिलती है तुझसे
एक होकर ज़र्रे ज़र्रे की रवानी लिखना !!


Tuesday, May 16, 2017

माना कि हम यार नहीं !!


माना  कि हम यार नहीं
लो तय है की प्यार नहीं
फिर भी नज़रें न तुम मिलाना
दिल को एतबार नहीं..
ख्वाब मिले तुमको कोई
नींदों में मेरी बो जाना
थक जाओ जो बुनते बुनते
मुझ में ही तुम सो जाना
उनमें हो रातें कुछ ऐसी
जिनमें इंतज़ार नहीं !
फिर भी नज़रें न तुम मिलाना
दिल को एतबार नहीं !!
खो जाऊँ  जो मैं भी कहीं
मुझे ढूंढ कहीं से रख जाना
छील जाने का दिल करता है
इतना कुछ तुम बक जाना
रुकना नहीं तब तलक
जो हो जाऊँ तार-तार नहीं !
फिर भी नज़रें न तुम मिलाना
दिल को एतबार नहीं  !!
बात मिले जो मेरी कोई
उसको चाँद बना लेना
हरफ़-हरफ़ मौसम हो जाये
दिल अपना बहला लेना
बिन तुम्हारे तो मेरी ख़ामोशी भी
होती गुलज़ार नहीं !
फिर भी नज़रें न तुम मिलाना
दिल को एतबार नहीं।।।।।।।।।।।।।



Monday, November 28, 2016

कभी कभी!!



कभी कभी कहानियाँ
यूँ खत्म हो जाती है !
वक़्त का मरहम मिलता नहीं
तो जैसे ज़ख्म हो जाती है !!
रिस जाती है आह भी
दिल के लहू में !
रंग में पड़कर प्यार के
आँखें भी नम हो जाती है!!
लफ्ज़ से लफ्ज़ जो कटता है
ख़ामोशी का रस्ता हटता है !
अपनी ही फिर नज़्म कोई
दिल पर सितम हो जाती है !!
बात नहीं कोई थमती है
धड़कन धड़कन रमती है !
पहन के दर्द का लिबास नया
सिसकियाँ मौसम हो जाती है  !!
दिल के पागलपन में आखिर
क्यों साँसों से कट जाओ !
प्यार तो ऐसे मिलता नहीं
मगर ज़िन्दगी कम हो जाती है !!

Saturday, November 19, 2016

फिर....!!



चलो मुस्कुरा ले
समंदर चुरा ले!
फिर यूँ ही भीगे
किनारे छुपा ले !!
कुछ यूँ ही हंस ले
फिर खुद में बस ले !
इस से पहले
कि दिल कोई निकाले !!
जी भर के रो ले
खुद को यूँ खोले!
भरने लगे आँसूं भी
लफ़्ज़ों के प्याले !!
दो घूँट पी ले
इस तरह जी ले !
कोई नज़्म फिर
मुझको गले लगा ले!! 

 

 

Tuesday, November 15, 2016

आह!!!

जिंदगी कभी यूँ भी उदास कर देती है
हो जाती हूँ खुद से दूर, तेरे आस पास कर देती है !!
ख्वाहिशों की गिरफ्त में रफ्ता रफ्ता कट जाती हूँ
और वो तुझको मेरे लिए खास कर देती है!!
इश्क़ का एक यही सबब तो नया है
वो तुमको अक्सर मेरे लिए तलाश कर देती है !!
कलाम बनता नही अब कोई मेरे दिल का कोई
और वो मेरी दुआओं को भी प्यास कर देती है!!
हो सके तो एक रोज़ लौट आना तुम
आह भी अब तो, इंतज़ार को काश कर देती है !!


Friday, November 11, 2016

दर्द!



दर्द को तो दर्द के बहाने चाहिए
हो सके तो गम भूलाने चाहिए !
न रखो यूँ कदम इश्क़ की दहलीज़ पर
रख दिया तो रिश्ते निभाने चाहिए !
है कोई तो वास्ता यूँ भी तेरा और मेरा
इसमें भी क्या वजूद पुराने चाहिए !
आह अक्सर दिल से ही निकलती है
क्यों  क़िस्से फिर दोहराने चाहिए!
दिल की परछाइयाँ गहरी होने लगी है
फिर क्यों रात के मुहाने चाहिए !
अब भी रखा है जिंदगी तले तुम्हारा दर्द
नहीं जीने को सपने सुहाने चाहिए !! 

Tuesday, November 1, 2016

डियर जिंदगी !!



डियर जिंदगी
रास्ता दे ,एक वजह दे
जो बस तेरे लिए जी जाऊं !!
कोई दर्द न दे मुझे
कमज़र्फ़ न दे मुझे
कि हर मुश्किल सिए जाऊं !!
कोई सोच दे
जो फलक तक ले जाये
कोई जिक्र दे
जो खुद तलक ले जाये
और मैं इश्क़ बस
खुद से ही किए जाऊं !!
कुछ लफ्ज़ दे
दिल बनाने के लिए
ख़ामोशी भी
खुद को पाने के लिए
दो कोर मुफलिसी के
भी जिए जाऊं !!



Thursday, October 27, 2016

आदत!!




मेरी आदत नहीं है
कोई रिश्ता तोड़ देना !
मुझे किसी ने कहा था
मोड़ देकर छोड़ देना !!(गुलज़ार )

एक तुम हो कि
मेरी कोई बात नहीं सुनते
और कभी यही कहते थे
दर्द मुझसे जोड़ देना !!
ये क्या है मेरा तुम्हारा
ना तो बना ना ही टूटा
फिर निभाने की शर्त पे
अब क्या ही जोर देना !!
मैं चाहता हूँ यही
अब रहे बनकर के अजनबी
क्यों मन की ख्वाहिशों को
इस दर्द का कोर देना !!



शुरू की चार पंक्तियाँ गुलज़ार की है।
थैंक यूँ सर मेरे साथ होने के लिए :)
reference:-https://cinemanthan.com/2013/10/29/dustola2010/